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तू चला गया भगवान के दर

                
                                                         
                            तू चला गया भगवान के दर,
                                                                 
                            
जाना तो एक दिन सबको है,
लेकिन तू वक्त से पहले क्यों
चला गया भगवान के दर।

वो भगवान भी बोल रहा होगा तुझे,
इतनी जल्दी क्यों थी पगले तुझे?
एक दिन मुझे लाना था अपने दर,
लेकिन इतनी जल्दी आना नहीं था तुझे।

क्यों आया रे पगले मेरे दर पे,
अपने फूले-फले परिवार को छोड़कर?
क्या तुझे मेरे पास आने से पहले
उन सबकी याद नहीं आई?

नहीं आना था पगले इतनी जल्दी मेरे दर पे,
एक दिन मैं खुद तुझे लेने आता
अपने दर में।

- ऋषभ कुमार साहू
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
13 घंटे पहले

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