आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मौत तू मुझे पल-पल डराती है और फिर आती नहीं है

                
                                                         
                            मौत तू मुझे पल-पल डराती है और फिर आती नहीं है,
                                                                 
                            
तू कब आयेगी, मैं बार-बार पूछता, पर बताती नहीं है।

मैं सोचता हूं, जब तेरा कोई ठिकाना नहीं है,
तू कब आएगी, जब तुझे यह बताना नहीं है।
फिर मैं भला क्यों, खुद को तुझसे छुपाता रहूँ,
मरने के डर से, कब तक खुद को बचाता रहूँ।

मौत तू मुझे पल-पल डराती है और फिर आती नहीं है,
तू कब आयेगी, मैं बार-बार पूछता, पर बताती नहीं है।

नदी प्रवाह सी कलरव करती जीवन धारा है,
तेरे भय-स्वभाव से मानव का जीवन हारा है।
क्या मृत्यु के बाद, मेरा ये जीवन मिट जायेगा?
नहीं, यह अंधा मोड़ है, फिर प्रकट हो जायेगा।

मौत तू मुझे पल-पल डराती है और फिर आती नहीं है,
तू कब आयेगी, मैं बार-बार पूछता, पर बताती नहीं है।

ओ मौत! मैं तुझसे डरूंगा नहीं, न भयभीत होऊंगा,
तेरे स्वागत की तैयारी करूँगा, न व्यर्थ समय खोऊँगा।
करूँगा विपस्यना का अभ्यास और अंतर्दृष्टि होऊंगा,
चित्त-काया की संवेदनाएं, अनित्य बोध पर सोधूँगा।

मौत तू मुझे पल-पल डराती है और फिर आती नहीं है,
तू कब आयेगी, मैं बार-बार पूछता, पर बताती नहीं है।

न बनने देंगे भवचक्र जो चित्त पर भवकर्म प्रकट करे,
रहूंगा सजग-तटस्थ ऐसे, जो चित्त को समता से भरे।
वाणी-काया कर्म करूँ ऐसे, जिससे पुण्य-पाथेय मिले,
जग से जाऊँ ऐसे, जैसे एक जलते दीपक की लौ बुझे।

मौत तू मुझे पल-पल डराती है और फिर आती नहीं है,
तू कब आयेगी, मैं बार-बार पूछता, पर बताती नहीं है।…

– अजय शोभने.
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
56 minutes ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर