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पाश के रचनात्मक प्रतिरोध के पीछे देश और दुनिया के प्रति उनकी मोहब्बत थी

मैं इनका मुरीद

पाश के रचनात्मक प्रतिरोध के पीछे देश और दुनिया के प्रति उनकी मोहब्बत थी

रत्नेश मिश्र, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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उसकी शहादत के बाद बाक़ी लोग 
किसी दृश्य की तरह बचे 
ताजा मूंदी पलकें देश में सिमटती जा रही झांकी की 
देश सारा बच रहा बाक़ी
 
उसके चले जाने के बाद 
उसकी शहादत के बाद 
अपने भीतर खुलती खिड़की में 
लोगों की आवाज़ें जम गयीं 


 भगत सिंह पर ये पंक्तियां अवतार सिंह संधू, 'पाश' ने लिखी थी। अजीब संयोग है कि आज के ही दिन देश के महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह और प्रतिरोध की कविता के सशक्त हस्ताक्षर अवतार सिंह सिंधू 'पाश', दोनों की ही पुण्यतिथि है। उन्होंने भगत सिंह की शहादत पर लिखा-

पहला चिंतक था पंजाब का
सामाजिक संरचना पर जिसने
वैज्ञानिक नज़रिये से विचार किया था

पहला बौद्धिक
जिसने सामाजिक विषमताओं की, पीड़ा की
जड़ों तक पहचान की थी

पहला देशभक्त
जिसके मन में
समाज सुधार का
एक निश्चित दृष्टिकोण था
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