मैं इनका मुरीद

166 Poems

                                                                           'बड़े अरमान से रखा है बलम तेरी कसम, 
प्यार की दुनिया में ये पहला क़दम'

भले ही इस खूबसूरत गीत को वजूद में आए 65 साल गुज़र गए हों, लेकिन इसकी तासीर आज भी मोहब्बत बिखेरे हुए है। यह महज़ एक गीत का जन्म ही नहीं था, बल्कि बॉली...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           मुनीर के अकेलेपन को समझते-समझते आप अकेले हो जाओगे। उनके अकेलेपन के नए अंदाज को समझने का लोगों में धैर्य नहीं था और इस तरह मुनीर को लोग 'अजनबी' समझ बैठे। मैंने मुनीर को जितना पढ़ा है उसके बाद मैं उन्हें 'अजनबी' नहीं बल्कि चाह के बगैर ग...और पढ़ें
                                                
3 months ago
                                                                           "तुम्हारे शहर में ये शोर सुन-सुन कर तो लगता है 
कि इंसानों के जंगल में कोई हाँका हुआ होगा 
कई फ़ाक़े बिता कर मर गया जो उस के बारे में 
वो सब कहते हैं अब ऐसा नहीं ऐसा हुआ होगा 
यहाँ तो सिर्फ़ गूँगे और बहरे लोग बस्ते हैं ...और पढ़ें
3 months ago
                                                                           नागार्जुन की विपुल रचनात्मकता की जिन विशेषताओं पर ध्यान जाता है वह है उनकी दृष्टि का निर्माल्य और असहमति का सौंदर्य। उनकी कविताओं और उपन्यासों के वस्तु वैविध्य पर गौर करें तो हम देखते हैं कि नागार्जुन की रचनाऍं समाज, राजनीति, संस्कृति और व्यवस्था पर...और पढ़ें
                                                
3 months ago
                                                                           मैं सोचता हूँ कि दिनकर की कविता में ऐसा क्या है जो हमें बार-बार आकर्षित करता है। वह है उनका खरापन, उनकी साफ़गोई और दिल खोल अंदाज़। उनकी कविता में गूँज और अनुगूँज बहुत है। दिनकर की कविताओं की सादगी बहुत प्रभावित करती है और कहन का तो कहना ही क्या? उनकी क...और पढ़ें
                                                
3 months ago
                                                                           हिन्दी के जिन चार बड़े समकालीन कवियों की चर्चा अक्सर होती है उनमें त्रिलोचन, केदार नाथ अग्रवाल, शमशेर और नागार्जुन,शामिल हैं। दरअसल प्रगतिशील धारा के इन कवियों को एक ऐसे दौर का कवि माना जाता है जब देश राजनीतिक उथल-पुथल के साथ तमाम जन आंदोलनों के दौर...और पढ़ें
                                                
3 months ago
                                                                           शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय बांग्ला भाषा के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार थे। हुगली जिले के देवानंदपुर गांव में 15 सितंबर 1876 में उनका जन्म हुआ। शरतचंद्र के नौ भाई-बहन थे। रवींद्रनाथ ठाकुर और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की लेखनी का शरत पर गहरा प्रभाव पड़ा। करीब 18 स...और पढ़ें
                                                
4 months ago
                                                                           हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्यधारा के प्रमुख हस्ताक्षर माने जानेवाले नामचीन कवि त्रिलोचन शास्त्री ने 9 दिसम्बर 2007 को इस भौतिक जगत को अलविदा कह दिया था। उन्होंने ग़ाजियाबाद में अंतिम सांस ली थी। उन्हें याद कर रहे हैं हिंदी के वरिष्ठ आलोचक डॉ. सेव...और पढ़ें
                                                
4 months ago
                                                                           ‘कुछ और भी तो हो इन इशारात के सिवा
यह सब तो ए निगाहें करम बात बात बात 
इक उमर कट गई है, तेरे इंतजार में
ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिनसे एक रात
अजीबतरीन तो इतना है कि 
दिल ही में कोई रह-रह के झिझक उठता है 
सुनते...और पढ़ें
4 months ago
                                                                           कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा।
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा।

हम भी वहीं मौजूद थे, हम से भी सब पूछा किए,
हम हँस दिए, हम चुप रहे, मंज़ूर था परदा तेरा।

'कल चौदहवीं की रात थी...और पढ़ें
4 months ago
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