सवाल करती कई आँखें मुंतज़िर हैं यहाँ
जवाब आज भी हम सोच कर नहीं आए
- आशुफ़्ता चंगेज़ी
कुछ वो खिंचे खिंचे रहे, कुछ हम खिंचे खिंचे
इस कशमकश में टूट गया रिश्ता चाह का
- रज़िया फ़सीह अहमद
अजब सी कशमकश तमाम उम्र साथ साथ थी
रखा जो रूह का भरम तो जिस्म मेरा मर गया
- अलीना इतरत
वादा कर के और भी आफ़त में डाला आप ने
ज़िंदगी मुश्किल थी अब मरना भी मुश्किल हो गया
-जलील मानिकपूरी
सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं
लेकिन इस तर्क-ए-मोहब्बत का भरोसा भी नहीं
- फ़िराक़ गोरखपुरी
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