आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ज़िंदगी की कशमकश पर चुनिंदा शेर...

जिंदगी की कशमकश पर चुनिंदा शेर...
                
                                                         
                            सवाल करती कई आँखें मुंतज़िर हैं यहाँ 
                                                                 
                            
जवाब आज भी हम सोच कर नहीं आए 
- आशुफ़्ता चंगेज़ी

कुछ वो खिंचे खिंचे रहे, कुछ हम खिंचे खिंचे
इस कशमकश में टूट गया रिश्ता चाह का
- रज़िया फ़सीह अहमद

अजब सी कशमकश तमाम उम्र साथ साथ थी
रखा जो रूह का भरम तो जिस्म मेरा मर गया
- अलीना इतरत

वादा कर के और भी आफ़त में डाला आप ने
ज़िंदगी मुश्किल थी अब मरना भी मुश्किल हो गया
-जलील मानिकपूरी
 
सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं 
लेकिन इस तर्क-ए-मोहब्बत का भरोसा भी नहीं 
- फ़िराक़ गोरखपुरी
 
आगे पढ़ें

6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर