सवाल करती कई आँखें मुंतज़िर हैं यहाँ
जवाब आज भी हम सोच कर नहीं आए
- आशुफ़्ता चंगेज़ी
कुछ वो खिंचे खिंचे रहे, कुछ हम खिंचे खिंचे
इस कशमकश में टूट गया रिश्ता चाह का
- रज़िया फ़सीह अहमद
अजब सी कशमकश तमाम उम्र साथ साथ थी
रखा जो रूह का भरम तो जिस्म मेरा मर गया
- अलीना इतरत
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