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ग़ालिब के ये चुनिंदा 25 शेर और इश्क़ की रस्म-रिवाज...

गालिब
                
                                                         
                            गालिब इश्क को जीते थे। वह इश्क का आखिरी छोर थे। उनकी नज्में और शेर ने सालों साल इश्क की तहजीब दुनिया को दी है। अगर हम यूं कहें कि इश्क गालिब से शुरू होता है तो यह कोई आश्चर्यजनक बात नहीं होगी। उनका हर शेर एक जिंदादिल आशिक की तरह इश्क की रस्मों को निभाता है। उनके कुछ ऐसे दमदार शेर हम आपकी नजर कर रहे हैं।
                                                                 
                            

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पर दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
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इम्तहाँ...

8 वर्ष पहले

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