जब कलम की तासीर को संगीत की तरंगों के साथ परोसा जाता है तब उसका स्वाद चखने वाले कान उसे मस्तिष्क से प्रवाहित कर सीधा दिल में उतार देते हैं, इसमें भी कुछ ही विरले वह गीत होते हैं जो सदियों तक याद रह जाते हैं और गुनगुनाए जाते हैं। पेश हैं हिन्दी सिनेमा के ऐसे ही कुछ गीत और उनके गीतकार जिन्होंने लोगों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।
फ़िल्म: हिमालय की गोद में
गायक/गायिका: मुकेश
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार: आनंद बख्शी
चाँद सी महबूबा हो मेरी कब ऐसा मैंने सोचा था
हाँ तुम बिलकुल वैसी हो जैसा मैंने सोचा था
ना रस्में हैं ना कसमें हैं
ना शिकवे हैं ना वादे हैं
इक सूरत भोली भाली है
दो नैना सीधे सादे हैं – 2
ऐसा ही रूप खयालों में था
जैसा मैंने सोचा था, हाँ…
मेरी खुशियाँ ही ना बाँटे
मेरे ग़म भी सहना चाहे
देखे ना ख्वाब वो महलों के
मेरे दिल में रहना चाहे
इस दुनिया में कौन था ऐसा
जैसा मैंने सोचा था, हाँ…
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आनंद बक्षी
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