किसी को कैसे बताएं ज़रूरतें अपनी
मदद मिले न मिले आबरू तो जाती है
- वसीम बरेलवी
इन चराग़ों में तेल ही कम था
क्यूं गिला फिर हमें हवा से रहे
- जावेद अख़्तर
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