नया साल आने वाला है। नया साल आदमी के मन में उम्मीद और आशा की लौ जगाता है। लोग नए उत्साह और नई उम्मीद के साथ अपने जीवन की शुरुआत करते हैं। हिंदी साहित्य में कई कवियों ने नए साल को अपने शब्द-भाव में व्यक्त किया है। इसी कड़ी में हम आज आपको रघुवीर सहाय की कुछ कविताओं से रूबरू करा रहे हैं। यह कविताएं आपके मन में उमंग और उम्मीद का दिया जलाएंगी।
आज फिर शुरू जीवन
आज मैंने एक छोटी-सी सरल सी कविता पढ़ी
आज मैंने सूरज को डूबते देर तक देखा
जी भर आज मैंने शीतल जल से स्नान किया
आज एक छोटी सी बच्ची आई, किलक मेरे कंधे चढ़ी
आज मैंने आदि से अंत तक एक पूरा गान किया
आज फिर जीवन शुरू हुआ।
दूसरे तीसरे जब इधर से निकलता हूं
देखता हूं, अरे इस वर्ष गुलमोहर में अभी तक फूल नहीं आया
इसी तरह आशा करते रहना कितना अच्छा है
विश्वास रहता है कि वह प्रज्ज्वलित रूप
मैं भूल नहीं आया।
नीम में बौर आया
इसकी एक सहज गंध होती है
मन को खोल देती है गंध वह
जब मति मंद होती है
प्राणों ने एक और सुख का परिचय पाया
रघुवीर सहाय
प्रतिनिधि कविताएं
संपादक-सुरेश शर्मा
राजकमल पेपरबैक्स
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आज फिर शुरू हुआ...
8 वर्ष पहले
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