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बिस्मिल अज़ीमाबादी की ग़ज़ल जो रामप्रसाद बिस्मिल के नाम से प्रसिद्ध हो गयी

Ram prasad bismil ghazal
                
                                                         
                            
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है
 
यह पंक्तियां रामप्रसाद बिस्मिल के नाम से प्रसिद्ध हो गयीं। संभवत: इसके कारण रहे होंगे कि यह शेर जिस ग़ज़ल का है उसमें बिस्मिल का तख़ल्लुस है और दूसरा यह कि फांसी पर चढ़ने से पहले रामप्रसाद बिस्मिल ने इसे पूरे जोशोखरोश से गाया था। वास्तव में इस शेर को लिखने वाले शायर ‘बिस्मिल अज़ीमाबादी’ हैं।

हालांकि रामप्रसाद बिस्मिल स्वयं भी कविताएं लिखा करते थे। उनकी कविताओं में देश-प्रेम प्रतिबिम्बित होता है। बि्स्मिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी थे जिन्हें 30 साल की उम्र में फ़ांसी दे दी गयी थी। वह ब्रिटिश सरकार के विरूद्ध काकोरी कांड जैसी घटनाओं में शामिल रहे। 
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वह ग़ज़ल जिसे बिस्मिल अज़ीमाबादी ने लिखा और रामप्रसाद बिस्मिल ने गाया

6 वर्ष पहले

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