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पढ़ें उन कवियों की रचनाओं को जो शिक्षक भी रहे हैं

कुमार विश्वास
                
                                                         
                            

कवि और शिक्षक दोनों का ही धर्म है कि वह समाज को रास्ता दिखाकर उसका मार्गदर्शन करें इसलिए किसी कवि का शिक्षक हो जाना बहुत ही सहज है और उसी तरह किसी शिक्षक का कवि हो जाना भी उतना ही सरल है। पढ़ें उन कवियों की रचनाओं को जिन्होंने शिक्षक का धर्म भी निभाया था।

कुमार विश्वास 

कुछ छोटे सपनों के बदले,
बड़ी नींद का सौदा करने,
निकल पडे हैं पांव अभागे, जाने कौन डगर ठहरेंगे !
वही प्यास के अनगढ़ मोती,
वही धूप की सुर्ख कहानी,
वही आंख में घुटकर मरती,
आंसू की खुद्दार जवानी,
हर मोहरे की मूक विवशता, चौसर के खाने क्या जाने
हार जीत तय करती है वे, आज कौन से घर ठहरेंगे 
निकल पडे़ हैं पांव अभागे, जाने कौन डगर ठहरेंगे !

कुछ पलकों में बंद चांदनी,
कुछ होंठों में कैद तराने,
मंजिल के गुमनाम भरोसे,
सपनों के लाचार बहाने,
जिनकी जिद के आगे सूरज, मोरपंख से छाया मांगे,
उनके भी दुर्दम्य इरादे, वीणा के स्वर पर ठहरेंगे 
निकल पडे़ हैं पांव अभागे, जाने कौन डगर ठहरेंगे

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7 वर्ष पहले

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