एक तख़्ती अम्न के पैग़ाम की
टांग दीजे ऊंचे मीनारों के बीच
- अज़ीज़ नबील
पैग़ाम ज़िंदगी ने दिया मौत का मुझे
मरने के इंतिज़ार में जीना पड़ा मुझे
- सफ़ी लखनवी
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