आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ये है हिंदी साहित्य के 'वर्ड्सवर्थ' सुमित्रानंदन पंत का मनोहारी नव वर्ष गीत...

सुमित्रानंदन पंत
                
                                                         
                            सुमित्रानंदन पंत हिंदी साहित्य के विलियम वर्ड्सवर्थ कहे जाने वाले छायावाद के बड़े कवि थे । प्रकृति के एक कुशल चितेरे कवि की आज पुण्यतिथि है। गुजरते हुए साल को विदा करते हुए पंत की कुछ उम्मीद भरी कविताओं के जरिए हम उन्हें याद करेंगे- 
                                                                 
                            

नवल हर्षमय नवल वर्ष यह,
कल की चिन्ता भूलो क्षण भर,

लाला के रँग की हाला भर
प्याला मदिर धरो अधरों पर !

फेन-वलय मृदु बाँह पुलकमय
स्वप्न पाश सी रहे कंठ में,

निष्ठुर गगन हमें जितने क्षण
प्रेयसि, जीवित धरे दया कर !
आगे पढ़ें

यदि स्वर्ग कहीं है पृथ्वी पर, तो वह नारी उर के भीतर

8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर