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ये है हिंदी साहित्य के 'वर्ड्सवर्थ' सुमित्रानंदन पंत का मनोहारी नव वर्ष गीत...

सुमित्रानंदन पंत
                
                                                         
                            सुमित्रानंदन पंत हिंदी साहित्य के विलियम वर्ड्सवर्थ कहे जाने वाले छायावाद के बड़े कवि थे । प्रकृति के एक कुशल चितेरे कवि की आज पुण्यतिथि है। गुजरते हुए साल को विदा करते हुए पंत की कुछ उम्मीद भरी कविताओं के जरिए हम उन्हें याद करेंगे- 
                                                                 
                            

नवल हर्षमय नवल वर्ष यह,
कल की चिन्ता भूलो क्षण भर,

लाला के रँग की हाला भर
प्याला मदिर धरो अधरों पर !

फेन-वलय मृदु बाँह पुलकमय
स्वप्न पाश सी रहे कंठ में,

निष्ठुर गगन हमें जितने क्षण
प्रेयसि, जीवित धरे दया कर !

यदि स्वर्ग कहीं है पृथ्वी पर, तो वह नारी उर के भीतर

छायावादी युग के प्रवर्तकों में सुमित्रानंदन पंत का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है। इनकी कविता में ना सिर्फ छायावादी प्रवृत्ति वरन् अपने समय में विकसित विचारधाराओं का वरण दिखाई देता है। 

यदि स्वर्ग कहीं है पृथ्वी पर, तो वह नारी उर के भीतर,
दल पर दल खोल हृदय के अस्तर
जब बिठलाती प्रसन्न होकर
वह अमर प्रणय के शतदल पर!

मादकता जग में कहीं अगर, वह नारी अधरों में सुखकर,
क्षण में प्राणों की पीड़ा हर,
नव जीवन का दे सकती वर
वह अधरों पर धर मदिराधर।

यदि कहीं नरक है इस भू पर, तो वह भी नारी के अन्दर,
वासनावर्त में डाल प्रखर
वह अंध गर्त में चिर दुस्तर
नर को ढकेल सकती सत्वर!
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यदि स्वर्ग कहीं है पृथ्वी पर, तो वह नारी उर के भीतर

8 वर्ष पहले

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