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ये हैं 'नासिर काज़मी' की 5 बेहतरीन ग़ज़लें...

Nasir Kazmi top beautiful ghazal
                
                                                         
                            

वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए
वो कश्तियाँ जलाने वाले क्या हुए

वो सुबह आते-आते रह गई कहाँ
जो क़ाफ़िले थे आने वाले क्या हुए

मैं जिन की राह देखता हूँ रात भर
वो रौशनी दिखाने वाले क्या हुए

ये कौन लोग हैं मेरे इधर-उधर
वो दोस्ती निभाने वाले क्या हुए

इमारतें तो जल के राख हो गईं
इमारतें बनाने वाले क्या हुए

ये आप-हम तो बोझ हैं ज़मीन के
ज़मीं का बोझ उठाने वाले क्या हुए

अपनी धुन में रहता हूँ...

अपनी धुन में रहता हूँ, मैं भी तेरे जैसा हूँ 

ओ पिछली रुत के साथी, अब के बरस मैं तन्हा हूँ 

तेरी गली में सारा दिन, दुख के कंकर चुनता हूँ 

मुझ से आँख मिलाये कौन, मैं तेरा आईना हूँ

मेरा दिया जलाये कौन, मैं तेरा ख़ाली कमरा हूँ

तू जीवन की भरी गली, मैं जंगल का रस्ता हूँ

अपनी लहर है अपना रोग, दरिया हूँ और प्यासा हूँ 

आती रुत मुझे रोयेगी, जाती रुत का झोंका हूँ

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अपनी धुन में रहता हूँ...

8 वर्ष पहले

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