चलती फिरती हुई आंखों से अज़ां देखी है
मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है
- मुनव्वर राना
कहो क्या मेहरबाँ ना-मेहरबाँ तक़दीर होती है
कहा माँ की दुआओं में बड़ी तासीर होती है
- अंजुम ख़लीक़
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X