चलती फिरती हुई आंखों से अज़ां देखी है
मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है
- मुनव्वर राना
कहो क्या मेहरबाँ ना-मेहरबाँ तक़दीर होती है
कहा माँ की दुआओं में बड़ी तासीर होती है
- अंजुम ख़लीक़
जिस ने इक उम्र दी है बच्चों को
उस के हिस्से में एक दिन आया
- अज्ञात
मैं ने माँ का लिबास जब पहना
मुझ को तितली ने अपने रंग दिए
- फ़ातिमा हसन
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