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राष्ट्रकवि 'मैथिलीशरण गुप्त' की कविताओं की विशेष पंक्तियां

Maithilisharan gupt hindi kavita
                
                                                         
                            

हिंदी साहित्य में खड़ी बोली की शुरुआत करने वाले कवि मैथिलीशरण गुप्त को महात्मा गांधी ने 'राष्ट्रकवि' की उपमा दी थी। उन्हें पद्मभूषण सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनकी जयंती को कवि दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। पढ़ें राष्ट्रकवि की लिखी कविताओं से कुछ विशेष पंक्तियां

नर हो, न निराश करो मन को

कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निराश करो मन को

 

चारुचंद्र की चंचल किरणें

चारुचंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल थल में
स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बरतल में
पुलक प्रकट करती है धरती, हरित तृणों की नोकों से
मानों झीम रहे हैं तरु भी, मन्द पवन के झोंकों से

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चारुचंद्र की चंचल किरणें

7 वर्ष पहले

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