हिंदी साहित्य में खड़ी बोली की शुरुआत करने वाले कवि मैथिलीशरण गुप्त को महात्मा गांधी ने 'राष्ट्रकवि' की उपमा दी थी। उन्हें पद्मभूषण सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनकी जयंती को कवि दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। पढ़ें राष्ट्रकवि की लिखी कविताओं से कुछ विशेष पंक्तियां
नर हो, न निराश करो मन को
कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निराश करो मन को
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चारुचंद्र की चंचल किरणें
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