आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हो जाये अच्छी भी फसल, पर लाभ कृषकों को कहां- मैथिलीशरण गुप्त

मैथिलीशरण गुप्त
                
                                                         
                            आधुनिक हिंदी कविता के महत्पूर्ण हस्ताक्षर मैथिली शरण गुप्त का 3 अगस्त को जन्मदिन है। उनकी रचनाओं में देशभक्ति, बंधुत्व, गांधीवाद, मानवता किसानों-गरीबों के प्रति करुणा और सहानुभूति व्यक्त कि गई है । आइये पढ़ते हैं किसानों पर उनकी कविता-
                                                                 
                            

हेमन्त में बहुदा घनों से पूर्ण रहता व्योम है
पावस निशाओं में तथा हंसता शरद का सोम है

हो जाये अच्छी भी फसल, पर लाभ कृषकों को कहां
खाते, खवाई, बीज ऋण से हैं रंगे रक्खे जहां

आता महाजन के यहां वह अन्न सारा

आता महाजन के यहां वह अन्न सारा अंत में
अधपेट खाकर फिर उन्हें है काँपना हेमंत में

बरसा रहा है रवि अनल, भूतल तवा सा जल रहा
है चल रहा सन सन पवन, तन से पसीना बह रहा
आगे पढ़ें

आता महाजन के यहां वह अन्न सारा

8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर