सुंदर मुंदरिए हो...गीत के बिना लोहड़ी पर्व अधूरा सा लगता है। इस गीत में रेवड़ी की मिठास है। मेल जोल की भीनी-भीनी सी सुगंध है। अग्नि की तपन है। इस गीत को गाने के बाद ही लगता है कि लोहड़ी मनाई गई है। इस मोहक गीत को हम यहां अपने पाठकों के लिए समक्ष रख रहे हैं।
सुंदर मुंदरिये हो !
तेरा कौन विचारा हो !
दुल्ला भट्टी वाला हो !
दुल्ले धी व्याही हो !
सेर शक्कर पाई हो !
कुड़ी दे जेबे पाई
कुड़ी दा लाल पटाका हो !
कुड़ी दा सालू पाटा हो !
सालू कौन समेटे हो !
चाचे चूरी कुट्टी हो !
ज़मिदारां लुट्टी हो !
ज़मींदार सदाए हो !
गिन-गिन पोले लाए हो !
इक पोला रह गया !
सिपाही फड के लै गया !
सिपाही ने मारी ईट
भावें रो भावें पिट
सानू दे दे लोहड़ी
तुहाडी बनी रवे जोड़ी !
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