करवा चौथ के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और चांद निकलने के बाद ही व्रतशाम को चांद दर्शन कर उसे अर्घ्य देकर ही कुछ ग्रहण करती हैं। चाँद शायरों की डायरी का वो पन्ना है जिस पर महबूबा की शक्ल-ओ-सीरत से लेकर रात की तन्हाई तक के किस्से लिखे जाते हैं। यह लेख़कों का वो पसंदीद बिम्ब है जिसकी प्रेरणा से उनकी कितनी ही नज़्में-ग़ज़लें सम्पूर्ण हो पाती हैं।
तुम भी लिखना तुम ने उस शब कितनी बार पिया पानी
तुम ने भी तो छज्जे ऊपर देखा होगा पूरा चाँद
- निदा फ़ाज़ली
उसके चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
आसमां पे चांद पूरा था लेकिन आधा लगा
-अज्ञात
चाँद जब दूर उफ़ुक़ में डूबा
तेरे लहजे की थकन याद आई
- अहमद नदीम क़ासमी
उसके चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
- इफ़्तिख़ार नसीम
वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा
तो इंतज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से मैं
- फ़रहत एहसास
बरगद की इक शाख़ हटा कर
जाने किस को झाँका चाँद
- परवीन शाकिर
मुझे ये ज़िद है कभी चाँद को असीर करूं
सो अब के झील में इक दायरा बनाना है
- शहबाज़ ख़्वाजा
फ़लक पर चाँद सितारे निकलने हैं हर शब
सितम यही है निकलता नहीं हमारा चाँद
- पंडित जवाहर नाथ साकी
चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में...
सूखी जामुन के पेड़ के रस्ते
छत ही छत पर जा रहा है चाँद
- गुलज़ार
ऐ ! सनम जिसने तुझे चाँद सी सूरत दी है
उसी अल्लाह ने मुझको भी मुहब्बत दी है
- आतिश
चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है
अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है
- फ़रहत एहसास
सीधा-सादा उफ़ुक़ से निकला
सीधा-सादा उफ़ुक़ से निकला था
सर पे अब चढ़ता जा रहा है चाँद
-गुलज़ार
डूब चुका जब नील गगन की झील में तेरा हर वादा
चमक रहा था मेरे दिल में फिर भी तेरे ग़म का चाँद
- क़तील शिफाई
हाथ में चाँद जहाँ आया मुक़द्दर चमका
सब बदल जाएगा क़िस्मत का लिखा जाम उठा
- बशीर बद्र
कल चौदवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा
- इब्ने इंशा
दूर के चाँद को ढूँडो न किसी आँचल में
ये उजाला नहीं आँगन में समाने वाला
- निदा फ़ाज़ली
रात को रोज़ डूब जाता है
चाँद को तैरना सिखाना है
- बेदिल हैदरी
माथे पे तेरे चमके है झूमर का पड़ा चाँद
ला बोसा चढ़े चाँद का वादा था चढ़ा चाँद
- ज़ौक
बे-सबब मुस्कुरा रहा है चाँद
कोई साज़िश छुपा रहा है चाँद
- गुलज़ार
चाँद जब दूर उफ़ुक़ में डूबा
तेरे लहजे की थकन याद आई
- अहमद नदीम क़ासमी
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...दूर उफ़ुक़ में डूबा
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