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महिलाओं के लिए शायरों के अल्फ़ाज़

International womens day 2020 shayari collection
                
                                                         
                            

शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास
रौनक़ें जितनी यहां हैं औरतों के दम से हैं
- मुनीर नियाज़ी


औरत को समझता था जो मर्दों का खिलौना
उस शख़्स को दामाद भी वैसा ही मिला है
- तनवीर सिप्रा

तमाम पैकर-ए-बदसूरती है मर्द की ज़ात
मुझे यक़ीं है ख़ुदा मर्द हो नहीं सकता
- फ़रहत एहसास


औरत अपना आप बचाए तब भी मुजरिम होती है
औरत अपना आप गंवाए तब भी मुजरिम होती है
- नीलमा सरवर

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6 वर्ष पहले

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