बारिश से मन का रिश्ता बहुत गहरा है, मन का मौसमी बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। लेकिन कहीं मूसलाधार बारिश के चलते बाढ़ की स्थिति तो कहीं सूखे की। पाठकों के लिए पेश है 'बारिश' पर लिखे शायरों के अल्फाज़-
कच्चे मकान जितने थे बारिश में बह गए
वर्ना जो मेरा दुख था वो दुख उम्र भर का था
- अख़्तर होशियारपुरी
अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना
हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है
- बशीर बद्र
वो जो प्यासा लगता था सैलाब-ज़दा था
पानी पानी कहते कहते डूब गया है
- आनिस मुईन
अब के बारिश में तो ये कार-ए-ज़ियाँ होना ही था
अपनी कच्ची बस्तियों को बे-निशाँ होना ही था
- मोहसिन नक़वी
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