आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ब्रजभाषा विशेष: जानिए ब्रज की बोली का इतिहास और उसमें रचित काव्य

brij bhasha special: history of brij bhasha and its poetry
                
                                                         
                            ब्रजभाषा उस बोली को कहा जाता है जो अपने नाम को चरितार्थ करते हुए ब्रज क्षेत्र में बोली जाती है। एक लंबे दौर के लिए साहित्य की आवाज़ बनने वाली इस भाषा ने समय के साथ विकास किया और बोली से भाषा का स्थान प्राप्त किया। 
                                                                 
                            

उदाहरण-

देखे मैं छबी आज अति बिचित्र हरिकी
आरुण चरण कुलिशकंज । चंदनसो करत रंग
सूरदास जंघ जुगुली खंब कदली । कटी जोकी हरिकी 
उदर मध्य रोमावली । भवर उठत सरिता चली 
वत्सांकित हृदय भान । चोकि हिरनकी (सूरदास)
आगे पढ़ें

सुमिर मन गोपाल लाल सुंदर अति रूप जाल

8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर