आजकल की तेज धुन और उन पर लिखे जाने वाले निरर्थक बोलों के बीच कुछ गीतकार ऐसे भी हैं जिनके शब्दों ने सीधे लोगों के दिल को छुआ और गीतों को सही अर्थ दिया। लोग इन्हें दिल से गुनगुनाते हैं तो लगता है कि गीतों का यह नव प्रयोग बेहद सफ़ल हो चला है। प्रसून जोशी, मनोज मुंतशिर, इरशाद कामिल और पीयूष मिश्रा सहित कई ऐसी प्रतिभाएं हैं जो नए ज़माने की नई सोच को नए कलेवर के साथ गीतों में ढाल रही है।
यहां प्रस्तुत हैं वह गीत जिन्होंने लोगों के ज़हन पर गहरा प्रभाव छोड़ा।
मनोज मुंतशिर...
मनोज मुंतशिर
मनोज मुंतशिर आज के दौर के शीर्ष गीतकारों में से एक हैं, उन्होंने कपूर एंड संस और एक विलेन के अलावा और भी कई फ़िल्मों के गीत लिखे हैं। मनोज ने अक्षय कुमार की 'बेबी', जॉन अब्राहम की 'वेलकम बैक' और अमिताभ बच्चन की 'वज़ीर' में भी गीत दिए हैं। मनोज का मानना है कि गानों में हमेशा प्यार की ख़ुमारी के अलावा उसके दुख दर्द को भी बयां करना चाहिए।
यह गाना फ़िल्म 'अय्यारी' का है, जिसे मनोज मुंतशिर ने लिखा है।
मेनू इश्क तेरा ले डूबा
हाँ मेनू इश्क तेरा ले डूबा
ऐसा क्यूँ होता है
तेरे जाने के बाद
लगता है हाँथों में
रह गए तेरे हाथ
तू शामिल है मेरे
हंसने में रोने में
है क्या कोई कमी
मेरे पागल होने में
मेनू इश्क तेरा ले डूबा
हाँ मेनू इश्क तेरा ले डूबा...
इरशाद कामिल
इरशाद कामिल
इरशाद कामिल ने 'जग घुमिया' और 'मनवा लागे' जैसे सुपरहिट गाने लिखे हैं। 'जब वी मेट' और 'रॉकस्टार' के गीत इरशाद कामिल की प्रतिभा को बेहतर ढंग से पेश करते हैं।'चमेली', 'जब वी मेट', 'मेरे ब्रदर की दुल्हन' और 'रॉकस्टार' जैसी फ़िल्मों में गीत लिखने वाले इरशाद कामिल के गीतों में एक लंबा ठहराव है। कामिल ने नए गीतों पर कहा कि यह आपको 'ध्यान' की ओर ले जाते हैं। समझ से जुड़े रहते हैं। समय का साथ नहीं छोड़ते। 'जब वी मेट' के गीत कामिल को एक क़ाबिल गीतकार का दर्जा दिया। 'रॉकस्टार' में कामिल ने रोमांस को एक गहराई दी। इरशाद कामिल की नई सोच ये गीत भी बेहतर ढंग से बताते हैं।
यह गाना इरशाद ने 'टाइगर ज़िंदा है' में लिखा है जिसे ख़ूब पसंद किया गया।
कच्ची डोरियों, डोरियों, डोरियों से
मैनु तू बांध ले
पक्की यारीयों, यारीयों, यारीयों में
होंदे ना फासले
ये नाराज़गी कागज़ी सारी तेरी
मेरे सोह्णेया सुन ले मेरी
दिल दियां गल्लां
करांगे नाल नाल बह के
आँख नाले आँख नू मिला के
अमिताभ भट्टाचार्य आज के एक उभरते हुए बोलों के सितारे हैं। उन्होंने 'अगर ज़िंदगी' और 'चन्ना मेरेया' जैसे गाने लिखे हैं और साथ ही हालिया रिलीज़ हुई फिल्म 'धड़क' के गाने भी लिखे हैं। यह गाना अमिताभ भट्टाचार्य ने फ़िल्म धड़क में लिखा है।
मरहमी सा चाँद है तू
दिलजला सा मैं अँधेरा
एक दूजे के लिए हैं
नींद मेरी ख्वाब तेरा
तू घटा है फुहार की
मैं घड़ी इंतज़ार की
अपना मिलना लिखा
इसी बरस है ना..
जो मेरी मंजिलों को जाती है
तेरे नाम की कोई सड़क है ना
जो मेरे दिल को दिल बनाती है
तेरे नाम की कोई धड़क है ना
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