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आज का शब्द- 'विस्मृत' और जयशंकर प्रसाद की सुप्रसिद्ध कविता: तुम्हारा स्मरण  

आज का शब्द- 'विस्मृत' और जयशंकर प्रसाद की सुप्रसिद्ध कविता: तुम्हारा स्मरण
                
                                                         
                            अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है-विस्मृत, जिसका अर्थ है- भुलाया हुआ या जिसका स्मरण न रहा हो। प्रस्तुत है जयशंकर प्रसाद की कविता- तुम्हारा स्मरण....
                                                                 
                            

सकल वेदना विस्मृत होती 
स्मरण तुम्हारा जब होता 
विश्वबोध हो जाता है
जिससे न मनुष्य कभी रोता

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6 वर्ष पहले

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