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नामवर सिंह की कविता- दोस्त, देखते हो जो तुम

namvar singh
                
                                                                                 
                            दोस्त, देखते हो जो तुम अंतर्विरोध-सा
                                                                                                

मेरी कविता कविता में, वह दृष्टि दोष है ।
यहाँ एक ही सत्य सहस्र शब्दों में विकसा
रूप रूप में ढला एक ही नाम, तोष है।
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2 months ago

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