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विश्व बालश्रम निषेध दिवस 2019: राजेश जोशी की कविता -सुबह सुबह बच्चे काम पर जा रहे हैं

विश्व बालश्रम दिवस 2019: राजेश जोशी की कविता -सुबह सुबह बच्चे काम पर जा रहे हैं
                
                                                         
                            कोहरे से ढंकी सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे हैं
                                                                 
                            
सुबह सुबह
बच्चे काम पर जा रहे हैं
हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति है यह

भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना
लिखा जाना चाहिए इसे सवाल की तरह
काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे?

क्या अंतरिक्ष में गिर गई हैं सारी गेंदें
क्या दीमकों ने खा लिया है
सारी रंग बिरंगी किताबों को

क्या काले पहाड़ के नीचे दब गए हैं सारे खिलौने
क्या किसी भूकंप में ढह गई हैं
सारे मदरसों की इमारतें

क्या सारे मैदान, सारे बगीचे और घरों के आंगन
खत्म हो गए हैं एकाएक
तो फिर बचा ही क्या है इस दुनिया में?
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7 वर्ष पहले

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