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हस्तीमल हस्ती: गहरे ज़ख़्मों को भरने में वक़्त तो लगता है

hastimal hasti famous ghazal pyar ka pahla khat likhne mein wat toh lagta hai
                
                                                         
                            


प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है

जिस्म की बात नहीं थी उन के दिल तक जाना था
लम्बी दूरी तय करने में वक़्त तो लगता है

गाँठ अगर लग जाए तो फिर रिश्ते हों या डोरी
लाख करें कोशिश खुलने में वक़्त तो लगता है

हम ने इलाज-ए-ज़ख़्म-ए-दिल तो ढूँढ़ लिया लेकिन
गहरे ज़ख़्मों को भरने में वक़्त तो लगता है

53 मिनट पहले

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