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इक़बाल अशहर : ...आज फिर याद मोहब्बत की कहानी आई

इकबाल अशहर
                
                                                         
                            ठहरी ठहरी सी तबीयत में रवानी आई 
                                                                 
                            

ठहरी ठहरी सी तबीयत में रवानी आई 
आज फिर याद मोहब्बत की कहानी आई 
आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा 
आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई 
मुद्दतों बाद चला उन पे हमारा जादू 
मुद्दतों बाद हमें बात बनानी आई 
मुद्दतों बाद पशेमाँ हुआ दरिया हम से 
मुद्दतों बाद हमें प्यास छुपानी आई 
मुद्दतों बाद खुली वुसअत-ए-सहरा हम पर 
मुद्दतों बाद हमें ख़ाक उड़ानी आई 
मुद्दतों बाद मयस्सर हुआ माँ का आँचल 
मुद्दतों बाद हमें नींद सुहानी आई 
इतनी आसानी से मिलती नहीं फ़न की दौलत 
ढल गई उम्र तो ग़ज़लों पे जवानी आई 

- इक़बाल अशहर 

साभार - रेख़्ता
9 वर्ष पहले

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