मेरे अच्छे डैडी
मैं सच कह रही हूं
मैं इस लड़के से शादी नहीं करूंगी
इससे तो बेहतर है
मैं पड़ोस के कुएं में जाकर डूब मरूंगी ।
आपसे किसने कह दी कि यह मुझे भाता है
यह तो सज्जनों की तरह टोपी लगाता है
मालूम नहीं पड़ता
कि इसके बाल दिलीप कट हैं
या टोपी के नीचे एकदम सफाचट हैं ।
क्या आप चाहते हैं
कि मैं जिंदगी भर रहूं रोती
यह तो महात्मा गांधी की तरह
पहनता है ऊंची धोती
और उसके ऊपर जवाहरकट जाकेट है
मुझे इससे हेट है
आप मेरे डैडी हैं
अरे कुछ तो अपनी बेटी का ख़्याल कीजिए
मेरी शादी इस बावले भालू से करवाकर
मत मेरी जिंदगी खराब कीजिए
यह तो बिल्कुल गंवार है चुकद्दम है
ऐसा लगता है
जैसे किसी गांव का मुकद्दम है
(सुरेश उपाध्याय की कविता 'लड़की की आधुनिक पसंद' कविता के ये चुनिंदा अंश हैं, जो 'यार सप्तक' नाम की किताब से लिए गए हैं। यह किताब डायमंड पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुई है।)
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