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चन्द्र शेखर आजाद के लिए श्रीकृष्ण सरल की कविता: मैं आजादी के परवानों का दीवाना  

chandra shekhar azad
                
                                                         
                            मैं आजादी के परवानों का दीवाना,
                                                                 
                            
मैं आजादी की डगर-डगर में घूमा हूँ
आजाद चन्द्रशेखर की है जो याद लिए,
उस ग्राम-ग्राम में, नगर-नगर में घूमा हूँ।

कंकड़-पत्थर, गलियों-चौराहों को मैंने,
उस महाबली की याद सँजोते देखा है
जिनसे उसके जीवन की गाथा जुड़ी हुई,
उन वृक्षों को भी मैंने रोते देखा है।

वह कुटिया, जिसमें उसने प्रथम साँस ली थी,
कहती, मुझको बेटे की आहट आती है
वे चट्टानें, जिन पर वह खेला-कूदा था,
उन चट्टानों की भी छाती फट जाती है। आगे पढ़ें

6 वर्ष पहले

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