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जो हर्फ़ ज़बां पर लाएंगे फिर वो ही कर दिखलाएंगे हम - नज़ीर अकबराबादी

nazeer akbarabad
                
                                                         
                            

हर आन तुम्हारे छुपने से ऐसा ही अगर दुख पाएंगे हम
तो हार के इक दिन इस की भी तदबीर कोई ठहराएंगे हम

बेज़ार करेंगे ख़ातिर को पहले तो तुम्हारी चाहत से
फिर दिल को भी कुछ मिन्नत से कुछ हैबत से समझाएंगे हम

गर कहना दिल ने मान लिया और रुक बैठा तो बेहतर है
और चैन न लेने देवेगा तो भेस बदल कर आएंगे हम

अव्वल तो नहीं पहचानोगे और लोगे भी पहचान तो फिर
हर तौर से छुप कर देखेंगे और दिल को ख़ुश कर जाएंगे हम

गर छुपना भी खुल जावेगा तो मिल कर अफ़्सूं-साज़ों से
कुछ और ही लटका सेहर-भरा उस वक़्त बहम पहुंचाएंगे हम

जब वो भी पेश न जावेगा और शोहरत होवेगी फिर तो
जिस सूरत से बन आवेगा तस्वीर खिंचा मंंगवाएंगे हम

मौक़ूफ़ करोगे छुपने को तो बेहतर वर्ना 'नज़ीर' आसा
जो हर्फ़ ज़बां पर लाएंगे फिर वो ही कर दिखलाएंगे हम

6 वर्ष पहले

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