आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं : जिगर मुरादाबादी

Jigar Moradabadi
                
                                                         
                            हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं 
                                                                 
                            
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं 

बे-फ़ाएदा अलम नहीं बे-कार ग़म नहीं 
तौफ़ीक़ दे ख़ुदा तो ये नेमत भी कम नहीं 

मेरी ज़बाँ पे शिकवा-ए-अहल-ए-सितम नहीं 
मुझ को जगा दिया यही एहसान कम नहीं 
आगे पढ़ें

5 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर