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अल्हड़ बीकानेरी: कवि हूं मैं मुझे बख़्श दीजिए दारोग़ा जी...

hassy kavita of Alhar Bikaneri
                
                                                         
                            हास्य कवि अल्हड़ बीकानेरी का जन्म हरियाणा के रेवाड़ी ज़िले के बीकानेर गांव में 1937 को हुआ था। उन्होंने अपने ख़ास अंदाज़ की हास्य कविताओं से लोकप्रयिता हासिल की। अल्हड़ बीकानेरी का मूल नाम श्यामलाल शर्मा था। उन्हें हरियाणा गौरव पुरस्कार, काका हाथरसी पुरस्कार और 1996 में राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किया गया। 17 जून 2009 को उन्होंने अंतिम सांस ली।
                                                                 
                            

डाकू नहीं, ठग नहीं, चोर या उचक्का नहीं
कवि हूं मैं मुझे बख़्श दीजिए दारोग़ा जी
काव्य-पाठ हेतु मुझे मंच पे पहुंचना है
मेरी मजबूरी पे पसीजिए दारोग़ा जी

ज़्यादा माल-मत्ता मेरी जेब में नहीं है अभी
पांच का पड़ा है नोट लीजिए दारोग़ा जी
पौन बोतल तो मेरे पेट में उतर गई
पौवा ही बचा है इसे पीजिए दारोग़ा जी


- अल्हड़ बीकानेरी  

साभार- कविता कोश
8 वर्ष पहले

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