आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Main Inka Mureed ›   kunwar narayan poetry is the signature of love and humanity
दुनिया में भाषाएं भले अनेक हों किंतु प्यार की तो एक ही भाषा है।

मैं इनका मुरीद

दुनिया में भाषाएं भले अनेक हों किंतु प्यार की तो एक ही भाषा है

अभिषेक शर्मा, कटक

3757 Views
कुंवर नारायण का काव्य मनुष्य और समाज के बीच रागात्मक संबंध के प्रसार का काव्य है। निस्संदेह प्रेम ही वह तत्व है जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़ता है। कवि का स्पष्ट मत है कि दुनिया में भाषाएं अनेक हैं किंतु प्यार की भाषा पूरी दुनिया में सर्वथा एक ही है, और इसी के द्वारा 'वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना का प्रचार-प्रसार होता है।  कुंवर नारायण का काव्य मानवीय विकृतियों और दुर्बलताओं के विनाश का काव्य है। मानवीय विश्वास की सहज बहाली, सत्य की स्थापना और प्रेम का प्रसार उनकी रचनाशीलता का मूल धर्म है। 'एक अजीब-सी मुश्किल' कविता में वे लिखते हैं- 

एक अजीब सी मुश्किल में हूं इन दिनों-
मेरी भरपूर नफरत कर सकने की ताकत
दिनों-दिन क्षीण पड़ती जा रही,

मुसलमानों से नफ़रत करने चलता
तो सामने ग़ालिब आकर खड़े हो जाते
अब आप ही बताइए किसी की कुछ चलती है
उनके सामने?
  आगे पढ़ें

सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!