बसंत के मौसम पर काव्य और साहित्य में काफी कुछ रचा गया है। शीत काल के बाद मौसम की नई करवट से प्रकृति की मन भावन छटा देखते ही बनती है । हिंदी गीतों में भी मौसम के इस नए कलेवर की झलक मिलती है । यहां हम बसंत पर फिल्माए गए लाेकप्रिय हिंदी गीतों का वर्णन कर रहे हैं । इन गीतों में बसंत को एक तरह से उमंग और मस्ती का पर्व माना गया है । जिसमें नायक नायिका नई उर्जा महसूस करते हुए पूरी पकृति को नए कलेवर के साथ खुश रहने का संदेश देते हैं । जनवरी के बाद फरवरी का माह आमतौर पर बसंत का माना जाता है इसी माह अंग्रेजी कल्चर में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है ।
शीत की ठिठुरन के बाद उन्मुक्त बसंत के आगमन से मन हर्ष से पुलकित हो उठता है और अपना खोया संसार पाना चाहता है । बसंत पर रचे गए सभी गीतों में अपने जीवन में कुछ नया जोड़ने के लिए बेताब प्रेमी जनों की यही इच्छा व्यक्त होती है । और इनके अलावा अन्य सभी भी बसंत केेे स्वागत के लिए तत्पर रहते हैं।
आई आई बसंती बेला...
पहला गीत 'आई आई बसंती बेला' 1960 में रिलीज फिल्म 'अंगुलिमाल' का है । जिसके बोल अनिल विश्वास ने लिखे जबकि संगीत भरत व्यास ने दिया है । लता मंगेशकर और मन्ना डे के गाये इस गीत में प्रकृति के नए रूप का वर्णन किया गया है । पर्वत,नदी वन, पेड़ों और फल फूलों से आच्छादित प्रकृति को प्रेरणा देने वाली कहा गया है ।
आया बसंत सखी...
दूसरा गीत आया बसंत सखी 1960 में रिलीज फिल्म बसंत का है जिसमें पहले गीत की तरह ही बसंत के आगमन पर खुशी व्यक्त की गई है । पन्ना लाल घोष के इस गीत को अरूण कुमार और पारूल घोष ने आवाजें दी हैं । गीत में बसंत के आगमन को विरह का अंत माना गया है । सरसों के पीले फूलों को खुशहाली मानते हुए उसके रंगों को मन की उमंग से जोड़ा गया है
आधा है चंद्रमा रात आधी...
तीसरा गीत 1959 में रिलीज फिल्म नवरंग का है आधा है चंद्रमा रात आधी काफी लोक प्रिय गीत है जिसमें नायक और नायिका के बीच आधी अधूरी मुलाकात का जिक्र किया गया है । बसंत के मौसम को उपहार मानते हुए इसमें अपने नयनों की अधूरी हसरत और बोली को पूरा करने की ख्वाहिश व्यक्त की गई है । बसंत एक तरह से विरह में डूबे प्रेमियों को दिलासा दे रहा है
गीत भरत व्यास ने लिखा है आवाज महेंद्र कपूर और आशा भोसले की है । संगीत सी रामचंद्र ने दिया है । शीत की ठिठुरन के बाद उन्मुक्त बसंत के आगमन से मन हर्ष से पुलकित हो उठता है और अपना खोया संसार पाना चाहता है । बसंत पर रचे गए सभी गीतों में अपने जीवन में कुछ नया जोड़ने के लिए बेताब प्रेमी जनों की इच्छा व्यक्त होती है ।
पंछी बनूं उड़ती फिरूं मस्त गगन में...
चौथा गीत पंछी बनूं उड़ती फिरूं मस्त गगन में नरगिस पर फिल्माया गया है 1956 में रिलीज फिल्म चोरी चोरी के इस गीत को हसरत जयपुरी ने लिखा था और संगीत लोकप्रिय शंकर जय किशन का था हर दिल अजीज लता मंगेशकर की आवाज में यह गीत प्रेमियों को उत्साह से भर देगा ।
अमर उजाला एप इंस्टॉल कर रजिस्टर करें और 100 कॉइन्स पाएं
केवल नए रजिस्ट्रेशन पर
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही
अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज आपके व्हाट्सएप पर
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X