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काका हाथरसी की ब्रजभाषा में लिखी हास्य कविता 'तेली कौ ब्याह'

kaka hathrasi hasya kavita teli ko byah
                
                                                         
                            

भोलू तेली गांव में, करै तेल की सेल
गली-गली फेरी करै, 'तेल लेऊ जी तेल'
'तेल लेऊ जी तेल', कड़कड़ी ऐसी बोली
बिजुरी तड़कै अथवा छूट रही हो गोली
कहं काका कवि कछुक दिना सन्नाटौ छायौ
एक साल तक तेली नहीं गांव में आयो

मिल्यौ अचानक एक दिन, मरियल बा की चाल
काया ढीली पिलपिली, पिचके दोऊ गाल
पिचके दोऊ गाल, गैल में धक्का खावै
'तेल लेऊ जी तेल', बकरिया सौ मिमियावै
पूछी हमने जे कहा हाल है गयौ तेरौ
भोलू बोलो, काका ब्याह है गयौ मेरौ

5 वर्ष पहले

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