अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
ये हमारी बद-नसीबी जो नहीं तो और क्या है
कि उसी के हो गए हम जो न हो सका हमारा
- शकील बदायूंनी
है इसी में प्यार की आबरू वो जफ़ा करें मैं वफ़ा करूँ
जो वफ़ा भी काम न आ सके तो वही कहें कि मैं क्या करूँ
- राजा मेहदी अली ख़ाँ
मुसाफ़िरों से मोहब्बत की बात कर लेकिन
मुसाफ़िरों की मोहब्बत का ए'तिबार न कर
- उमर अंसारी
सुबूत है ये मोहब्बत की सादा-लौही का
जब उस ने वादा किया हम ने ए'तिबार किया
- जोश मलीहाबादी
मैं उस के वादे का अब भी यक़ीन करता हूँ
हज़ार बार जिसे आज़मा लिया मैं ने
- मख़मूर सईदी
वो कहते हैं मैं ज़िंदगानी हूँ तेरी
ये सच है तो उन का भरोसा नहीं है
- आसी ग़ाज़ीपुरी
Urdu Poetry: नशे की झोंक में देखा नहीं कि दुनिया है