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चिराग़ जैन की कविता- दूसरा प्यार

हास्य

चिराग़ जैन की कविता- दूसरा प्यार 

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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फिर से मन में अंकुर फूटे, फिर से आँखों में ख्वाब पले
फिर से कुछ अंतस में पिघला, फिर से श्वासों से स्वर निकले
फिर से मैंने सबसे छुपकर, इक मन्नत मांगी ईश्वर से
फिर से इक सादा-सा चेहरा, कुछ ख़ास लगा दुनिया भर से
फिर इक लड़की के इर्द-गिर्द, जीवन के सब प्रतिमान बने
फिर इक चेहरे के हाव-भाव, सुन्दरता के उपमान बने आगे पढ़ें

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