हिंदी के जाने माने साहित्यकार व आलोचक नामवर सिंह का 93 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह काफी समय से बीमार थे और एम्स में भर्ती थे। जानकारी के मुताबिक उन्होंने लगभग 11:50 बजे अंतिम सांस ली।
साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई 1926 को बनारस के गांव जीयनपुर में हुआ था। हिन्दी साहित्य में एम.ए. और पीएचडी करने के पश्चात काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। उन्होंने 1959 में चकिया चन्दौली के लोकसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से चुनाव भी लड़ा था। इसके बाद वह दिल्ली आ गए थे, यहां उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र की स्थापना की। नामवर सिंह ने हिंदी साहित्य में आलोचना और साक्षात्कार विधा को नई पहचान ही नहीं बल्कि नई ऊंचाई भी दी।
आलोचना में उनकी किताबें पृथ्वीराज रासो की भाषा, इतिहास और आलोचना, कहानी नई कहानी, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परंपरा की खोज, वाद विवाद संवाद आदि मशहूर हैं। उनका साक्षात्कार ‘कहना न होगा’ भी साहित्य जगत में लोकप्रिय है। इसके अलावा उनकी छायावाद, नामवर सिंह और समीक्षा, आलोचना और विचारधारा जैसी किताबें भी चर्चित हैं।
उनकी मौत के बाद वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने लिखा कि हिंदी में फिर सन्नाटे की खबर। उन्होंने लिखा कि नायाब आलोचक, साहित्य में दूसरी परंपरा के अन्वेषी डॉ. नामवर सिंह का निधन हो गया है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि 26 जुलाई को वे 93 वर्ष के हो जाते। उन्होंने अच्छा जीवन जिया, बड़ा जीवन पाया।
नामवर सिंह का अंतिम संस्कार बुधवार को अपराह्न सम्भवतः लोदी दाहगृह में होगा।
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