अमर उजाला शब्द-सम्मान 2022 के अंतर्गत नादिया मुराद की अंग्रेजी कृति ‘द लास्ट गर्ल’ के हिंदी अनुवाद के लिए आशुतोष गर्ग को भाषा-बंधु सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है। यह श्रेणी विशेष तौर पर भारतीय भाषाओं में अनूदित कृति के लिए है।
आशुतोष गर्ग का जन्म 1973 में दिल्ली में हुआ। रामजस स्कूल, नई दिल्ली से स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम.ए. किया। इन्होंने भारतीय विद्या भवन से स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पत्रकारिता) और भारतीय अनुवाद परिषद् से स्नातकोत्तर डिप्लोमा (अनुवाद) के अलावा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से एम.बी.ए. में डिग्री भी प्राप्त की है।
आशुतोष को विरासत में अपने पिताजी एवं प्रतिष्ठित लेखक-अनुवादक डॉ. लक्ष्मी नारायण गर्ग से लेखन-प्रतिभा और माताजी आशा गर्ग से असीम धैर्य एवं ईश्वर में आस्था प्राप्त हुई है। स्कूली दिनों से कविता-कहानी आदि का लेखन आरंभ शुरु हुआ जो समय के परिष्कृत होता गया। जीवन के कुछ वर्ष नौकरी एवं पारिवारिक व्यस्तता में बीते और पिछले लगभग दो दशक से सक्रिय लेखन कर रहे हैं। अंग्रेजी और हिंदी, दोनों भाषाओं पर समान अधिकार रखते हैं तथा अनुवाद-क्षेत्र में एक चर्चित नाम हैं।
आशुतोष हिंदी-अंग्रेजी भाषाओं में मौलिक रूप से लिखने के अलावा दोनों भाषाओं की पुस्तकों का सहज-सुंदर अनुवाद भी कर लेते हैं। यही कारण है कि बीते 20 वर्षों में उनकी 34 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 26 अनूदित कृतियाँ हैं। अधिकांश अनुवाद एवं लेखन पौराणिक/आध्यात्मिक साहित्य पर आधारित है। अखबार में पौराणिक विषयों पर लंबे समय तक साप्ताहिक कॉलम लिख चुके आशुतोष ने रस्किन बॉन्ड, पॉल ब्रन्टन, दलाई लामा, चित्रा बैनर्जी दिवाकरुणी, अशोक बैंकर, कविता काणे, वनमाली, एलिफ़ शफ़ाक जैसे प्रतिष्ठित लेखकों की अनेक बेस्टसेलर पुस्तकों के सफल अनुवाद किए जिन्हें पाठकों ने खूब सराहा। इनमें दशराजन्, द्रौपदी की महाभारत, श्रीकृष्ण लीला, श्रीहनुमान लीला, श्रीराम लीला, अर्जुन, लंका की राजकुमारी, विश्वामित्र, गुप्त भारत की खोज, धर्म से आगे, आनंद का सरल मार्ग, देवदारों के साये में आदि प्रमुख हैं। आशुतोष द्वारा अनूदित पुस्तक ‘सीतायण’ को वैली ऑफ वर्ड्स (vow) पुरस्कार-2020 के लिए 5 बेहतरीन पुस्तकों में शॉर्टलिस्ट किया गया था। वर्ष 2022 के ‘अमर उजाला शब्द सम्मान’ के अंतर्गत आशुतोष द्वारा अनूदित पुस्तक ‘द लास्ट गर्ल’ को सर्वश्रेष्ठ अनुवाद के लिए “भाषा बंधु” अलंकरण दिया जा रहा है।
आशुतोष जितना अच्छा अनुवाद करते हैं, उतना ही बेहतरीन लिखते भी हैं। 26 किताबों के अनुवाद के अलावा उनकी 8 मौलिक कृतियाँ भी हैं। इनमें 2 कोश, बच्चों की पहेलियाँ, सूक्ति-संग्रह और 4 पौराणिक उपन्यास (अश्वत्थामा, इंद्र, कल्कि, कुबेर) शामिल हैं। इनका पहला उपन्यास ‘अश्वत्थामा’ जागरण बेस्टसेलर रहा और प्रकाशन के 5 साल बाद भी अत्यंत लोकप्रिय है। इसके मराठी एवं गुजराती संस्करण भी प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त आशुतोष के उपन्यास “कल्कि: दसवें अवतार का उदय” (पुत्र अत्रि गर्ग के सह-लेखन में) को आज तक चैनल के प्रसिद्ध मंच ‘साहित्य तक’ ने वर्ष 2021 के टॉप 10 उपन्यासों में शामिल किया था। हाल में प्रकाशित हुआ इनका चौथा उपन्यास “कुबेर” इन दिनों चर्चा में है।
आशुतोष नियमित रूप से पत्र-पत्रिकाओं में लिखते हैं। वर्तमान में रेल मंत्रालय में वरिष्ठ पदाधिकारी हैं। वर्ष 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी द्वारा भारतीय रेल में स्काउटिंग में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है।
संपर्क – ashutoshgarg343@gmail.com
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