प्रेम में राधा
भावना के बल से –
कृष्ण को बाँधा ।
प्यार में डूबा
आनन्द भी ,पीड़ा भी
मन अजूबा ।
तुम जो मिले
जीवन में फाल्गुन,
सुमन खिले ।
हाथों में हाथ
जिजीविषा बढ़ाता
तुम्हारा साथ ।
बाहों में तुम
सारे संशय-भ्रम
हो गये गुम ।
छुपाऊँ कैसे
एहसास प्यार का
बताऊँ कैसे ।
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