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रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ की हाइकु कविता- व्याकुल गाँव

रामेश्वर काम्बोज की हाइकु कविता-व्याकु गांव
                
                                                         
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व्याकुल गाँव
व्याकुल होरी के हैं
घायल पाँव ।

2
कर्ज़ का भार
उजड़े हुए खेत
सेठ की मार ।

3
बेटी मुस्काई
बहू बन पहुँची
लाश ही पाई । 

यह जनता
मेले में गुमशुदा 
अबोध शिशु

5
नई सभ्यता
आंगन में उगाते
हैं नागफनी

6
दाएँ न बाएँ
खड़े हैं अजगर
किधर जाएँ ।
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7 वर्ष पहले

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