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डॉ. कुंवर बेचैन

हाइकु

'कुंवर बेचैन' की हाइकु कविता : रहता मौन, तो ऐ झरने तुझे, देखता कौन? 

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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जल चढ़ाया
तो सूर्य ने लौटाए
घने बादल। 

तटों के पास
नौकाएं तो हैं, किन्तु
पाँव कहाँ हैं? 

ज़मीन पर
बच्चों ने लिखा 'घर'
रहे बेघर। 

रहता मौन
तो ऐ झरने तुझे 
देखता कौन? 

चिड़िया उड़ी
किन्तु मैं पिंजरे में
वहीं का वहीं! 

ओ रे कैक्टस 
बहुत चुभ लिया
अब तो बस 

आपका नाम
फिर उसके बाद
पूर्ण विराम! 

- कुंवर बेचैन 

साभार - कविता कोश 
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