जल चढ़ाया
तो सूर्य ने लौटाए
घने बादल।
तटों के पास
नौकाएं तो हैं, किन्तु
पाँव कहाँ हैं?
ज़मीन पर
बच्चों ने लिखा 'घर'
रहे बेघर।
रहता मौन
तो ऐ झरने तुझे
देखता कौन?
चिड़िया उड़ी
किन्तु मैं पिंजरे में
वहीं का वहीं!
ओ रे कैक्टस
बहुत चुभ लिया
अब तो बस
आपका नाम
फिर उसके बाद
पूर्ण विराम!
- कुंवर बेचैन
साभार - कविता कोश
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