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मां

                
                                                         
                            मां के हाथ की
                                                                 
                            
रूखी - सूखी रोटी भी
सुरभोग है।

मां पास है तो
धरा पर स्वर्ग है
घर अपना।

मां की ममता,
नभ की विशालता
असीमित है।

मां का अशीष
हर अभिशाप से
शक्तिशाली है।

मां धरा पर
साक्षात ईश्वर का
प्रतिरूप है।

मां की ममता,
उसकी दयालुता
वंदनीय है।

दिनेश यादव

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8 वर्ष पहले

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