अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
- बशीर बद्र
आप के बा'द हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
- गुलज़ार
तुम भूल कर भी याद नहीं करते हो कभी
हम तो तुम्हारी याद में सब कुछ भुला चुके
- शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
याद उसे इंतिहाई करते हैं
सो हम उस की बुराई करते हैं
- जौन एलिया
कौन सी बात है तुम में ऐसी
इतने अच्छे क्यूँ लगते हो
- मोहसिन नक़वी
वक़्त की गर्दिशों का ग़म न करो
हौसले मुश्किलों में पलते हैं
- महफूजुर्रहमान आदिल
Urdu Poetry: ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है!