राजेन्द्र मोहन भटनागर द्वारा लिखित उपन्यास 'अथ पद्मावती' चित्तौड़ की विश्व-विख्यात रानी पद्मावती का चित्रण करता है। इतिहास को लोक-साहित्य की शक्ल लेने में सैकड़ों साल लग जाते हैं। चितौड़ की रानी पद्मावती की कथा कुछ ऐसी ही है। पद्मावती की कहानी इतिहास के पन्नों से निकलकर अब एक आख्यान या पुराण कथा बन चुकी है। इस उपन्यास में पद्मावती के बचपन से लेकर यौवन तक की अनुभूतियां बसी हैं। इतिहास के पन्नों में दबे हुए चरित्र जब लोकजीवन का हिस्सा बन जाएं, तो वह अमर हो जाते हैं। धीरे-धीरे ऐसे पात्र और चरित्र संस्कृति का हिस्सा बन जाते हैं। चित्तौड़ की रानी पद्मावती का चरित्र इसका अप्रतिम उदाहरण हैं। साहित्य संवेदनाओं का संस्कार है। साहित्य में सांस्कृतिक तत्व स्वतः समाहित हो जाते हैं।
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